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घरों तक पहुंचेगा सरकारी बैंक , मिलेगी जमा निकासी सुविधा

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 अब सरकारी बैंक आपके दरवाजे तक पहुंचेंगे। इस वर्ष अक्टूबर से ग्राहक घर पर भी नकदी जमा कराने और निकासी की सुविधा ले सकेगें। शुरुआत में 100 शहरों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस काम के लिए अलग से डोरस्टेप बैंकिंग एजेंट नियुक्त किए जाएंगे। देश के सभी सरकारी बैंक डोरस्टेप बैकिंग सुविधा देगें। घर के दरवाजे पर वित्तीय सेवा हासिल करने के लिए मामूली शुल्क भी देना पड़ेगा। अभी हाल ही में 9 सितंबर को डोरस्टेप बैंकिंग सेवा का अनावरण किया गया।  डोरस्टेप बैकिंग सेवा में वरिष्ठ नागरिक , विधवा , विकलांग, आर्मी स्टाफ , सीआरपीएफ , छात्र , सैलरी वालें कर्मचारी , कारपोरेट ग्राहक , खुदरा दुकानदार , और रेहड़ी पटरी वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। कस्टमर केयर , बेव पोर्टल और मोबाइल एप के जरिये ग्राहक डोरस्टेप बैंकिंग सेवा की गुजारिश कर सकता है। अभी चेक बुक हासिल करने और डिमांड ड्राफ्ट व डिपाँजिट रसीद मंगाने जैसी - गैर वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध है। डोरस्टेप बैकिंग के तहित सेेवा की मााँँग करते ही एजेंंट के पास इसकी सूचना चली जाएगी। ग्राहक एप या पोर्टल के जरिये यह जानकारी रख सकता है , कि उस वक्त ऐजेंट कहाँ पर ह...

कालापानी का खौफनाक सच

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कालापानी जिसका नाम सुनकर 1900 के दशक के लोग थर-थर कापने लगते थे। कालापानी जिसे पृथ्वी के नरक की संज्ञा दी गई थी , लोग कालापानी की सजा कि बजाय मरना पसंद करते थे। और आज भी किसी बुजुर्ग व्यक्ति से कालापानी के इतिहास के बारे मे पूछने पर उनकी आँखों में  वो डर नजर आ जाता हैं। किन्तु आज की पीढी के लोग कालापानी के खौफनाक इतिहास से अनभिज्ञ है। आइये इस लेख में हम लोग उस कालापानी के काले इतिहास के बारे मे जानने की कोशिश करते है। कालापानी या जिसे सेलुलर जेल के नाम से भी जाना जाता हैं, जिसका निर्माम अंग्रेजों ने अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में कराया था। अंग्रेजों द्वारा यह जेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियोंं को कैद रखने के लिए बनाई गई थी। यह जेल भारत से कई किलोमीटर दूर बीच समुद्र मेंं बनी थी। और एक बार जो भी इस जेल मे आ जाता था , बो कभी भी बाहर नहीं निकल पाता था और अपने मरते दम तक कड़ी से कड़ी यातनाएं सहन करते थे। जिस किसी को भी कालापानी की सजा मिली , उसे जीते-जी नरक में भेज दिया गया। यह सजा मौत से भी बदतर है। कालापानी जेल का निर्माण कालापानी जेल का निर्माण 1896 मे प्...