घरों तक पहुंचेगा सरकारी बैंक , मिलेगी जमा निकासी सुविधा

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 अब सरकारी बैंक आपके दरवाजे तक पहुंचेंगे। इस वर्ष अक्टूबर से ग्राहक घर पर भी नकदी जमा कराने और निकासी की सुविधा ले सकेगें। शुरुआत में 100 शहरों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस काम के लिए अलग से डोरस्टेप बैंकिंग एजेंट नियुक्त किए जाएंगे। देश के सभी सरकारी बैंक डोरस्टेप बैकिंग सुविधा देगें। घर के दरवाजे पर वित्तीय सेवा हासिल करने के लिए मामूली शुल्क भी देना पड़ेगा। अभी हाल ही में 9 सितंबर को डोरस्टेप बैंकिंग सेवा का अनावरण किया गया।  डोरस्टेप बैकिंग सेवा में वरिष्ठ नागरिक , विधवा , विकलांग, आर्मी स्टाफ , सीआरपीएफ , छात्र , सैलरी वालें कर्मचारी , कारपोरेट ग्राहक , खुदरा दुकानदार , और रेहड़ी पटरी वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। कस्टमर केयर , बेव पोर्टल और मोबाइल एप के जरिये ग्राहक डोरस्टेप बैंकिंग सेवा की गुजारिश कर सकता है। अभी चेक बुक हासिल करने और डिमांड ड्राफ्ट व डिपाँजिट रसीद मंगाने जैसी - गैर वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध है। डोरस्टेप बैकिंग के तहित सेेवा की मााँँग करते ही एजेंंट के पास इसकी सूचना चली जाएगी। ग्राहक एप या पोर्टल के जरिये यह जानकारी रख सकता है , कि उस वक्त ऐजेंट कहाँ पर ह...

नई शिक्षा नीति 2020

देश मे नई शिक्षा नीति का बिल पारित हो चुका है। और शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि शिक्षा नीति को बनाने के लिए देश की 2.5 लाख ग्राम पंचायतों , 6600 ब्लॉक और 676 जिलों के शिक्षाविदों , अध्यापकों, अभिभावकों और छात्रों तक से सलाह ली गई हैं। इस शिक्षा नीति ने देश की शिक्षा का स्वरूप ही परवर्तित परवर्तित कर दिया है। नई शिक्षा नीति के मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं।


(1) -  10+2 की जगह 5+3+3+4 के पैटर्न पर 

अब स्कूली शिक्षा का ढ़ाचा चार स्तर का होगा। जिनमें पहला फाउंडेशन स्तर होगा, जो 5 साल का होगा। फिर प्रारंभिक स्तर और मिडिल स्तर तीन- तीन साल के होगे। और सेकेंडरी स्तर चार साल का होगा। 
                         इसमें फाउंडेशन स्तर प्री- प्राइमरी से लेकर दूसरी कक्षा तक के लिए होगा। प्रारम्भिक स्तर कक्षा तीन से पांच , मिडिल स्तर कक्षा छह से आठ और सेकेंडरी स्तर कक्षा 9 से 12 तक के लिए होगा।




 (2) -  अब अपनी मर्जी से चुनें विषय

भविष्य की जरूरत को देखकर युवाओं को अब अपनी मर्जी के हिसाब से अपना पसंदीदा विषय चुनने का अधिकार होगा।
अभी तक कला , विज्ञान और काँमर्स के विभिन्न कोर्स के लिए छात्रों को पहले से तय विषयों को ही चुनना पडता था। परन्तु अब छात्र अपनी मर्जी से कोई भी विषय चुन सकता हैं।
                                          यहाँ तक की भौतिक विज्ञान का छात्र चाहे तो संगीत को दूसरे विषय के रुप में अपना सकता है। देश के विभिन्न शिक्षाशास्त्रीयों ने कहा हैं कि इस लचीलेपन का उद्देश्य छात्रों की प्रतिभा को पूरी तरह से निखरने का मौका देना है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो।



(3) -  हायर एजुकेशन में हर साल की डिग्री मिलेगी

नई शिक्षा नीति के तहित छात्रों को तीन साल के अनिवार्य डिग्री कोर्स के बजाय अब छात्रों को हर साल की पढ़ाई का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। एक साल की  Ba/Bsc कि पढ़ाई करने के बाद सर्टिफिकेट, दो साल की पढ़ाई के बाद एडवांस डिप्लोमा और तीन साल की पढाई पूरी करने वालों को स्नातक की डिग्री दी जाएगी। 
                       वहीं किसी कारण से एक साल या दो साल के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को एक अंतराल के बाद फिर आगे की पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिलेगी। वहीं पहले और दूसरे साल की पढ़ाई में मिले अंक डिजिटल रूप से तैयार " एकेडमिक बैंक आँफ क्रेडिट " मे जमा होगे , जो अंतिम डिग्री में बाद में अपने आप जुड़ जाएंगे।





(4) - नही थोपी जाएगी कोई भाषा


नई शिक्षा नीति में स्थानीय संदर्भों और भाषाओं को पूरा स्थान मिलेगा। इसके तहित स्कूलों में पांचवीं कक्षा तक स्थानीय भाषा में पढ़ाने का सुझाव है। इससे पहले शिक्षा नीति में त्रिभाषा फार्मूला रखा गया था जिसके तहित स्कूलों में एक क्षेत्रीय भाषा , अंग्रेजी और हिंदी भाषा को स्थान दिया गया था। किन्तु दक्षिणी राज्यों में इसका विरोध हुआ था । और इस विरोध को देखते हुऐ अब इसे लचीला किया गया हैं। और अब किसी भी भाषा को आवश्यक नहीं बनाया गया है
                                       नई शिक्षा नीति मे स्थानीय भाषाओं और हुनर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। पाली , प्राकृत और पर्शियन जैसी लुप्त होती जा रही भाषाओं को बचाने के लिए विशेष कदम उठाए गए है। 


(5) -  शिक्षकों के लिए भी बनेगा एकसमान मानक


शिक्षकों का प्रशिक्षण भी नई शिक्षा नीति के केन्द्र में हैं। नीति में मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने की पूरी कोशिश की गई है। इसमें छात्रों के साथ शिक्षकों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रावधान किया गया है , जिससे उनकी योग्यता का फायदा छात्रों को मिल सके। इसके लिए अगले दो सालों के भीतर शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का मानक तैयार किया जाएगा। 


(6) -  शिक्षा में जीडीपी का 4.43 %  से बढ़ाकर 6 %

देश मे युवाओं की बड़ी संख्या के मद्देनजर अनका सकारात्मक और अधिकतम उपयोग करने के लिए उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी सकल नामांकन अनुपात पहुचाने का लक्ष्यय हैं। फिलहाल यह 27 प्रतिशत है।इसके लिये उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी। नई शिक्षा नीति के व्यापक लक्ष्यो को पूरा करने के लिए ज्यादा धन की जरूरत होगी। इसलिए जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा मे लगाने का लक्ष्य रखा गया है , जो अभी 4.43 फीसदी है।





 अगर आप को इस लेख में कोई परेशानी हुई है, या आपको इस बारे में और जानकारी चाहिए तो नीचें कमेंट अवश्य करें। 



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