घरों तक पहुंचेगा सरकारी बैंक , मिलेगी जमा निकासी सुविधा
भारतीय कृषि की बदहाली की बड़ी बजह यह रही है , कि यहाँ सभी फसलो के उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया गया।
इसके अलावा कृषि उपज के भंडारण, विपणन, प्रसंस्करण की ऐकीकृत नीति भी नहीं बन पाई। यही कारण हैं कि कभी आलू , तो कभी प्याज , तो कभी टमाटर सड़को पर फेंके जाते हैं। और कभी - कभी इनके मूल्य इतने ज्यादा हो जाते है कि आम आदमी को लेने पसीना छूट जाता हैं।
लेकिन अब यह समस्या दूर होने वाली है। भारतीय रेलवे ने देश के एक छोर से दूसरे छोर तक ताजी सब्जी , फल , फूल आदि पहुंचाने के लिए किसान रेल सेवा शुरू की हैं। गत दिनों पहली किसान पार्सल ट्रेन महाराष्ट्र के देवलाली से बिहार के दानापुर के बीच चली। यह ट्रेन पूरी तरह वातानुकूलित है। एक तरह से यह पटरी पर दौड़ता हुआ कोल्ड स्टोरेज हैं। यह ट्रेन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगी। और 14 स्टेशनों पर रुकेगी। जहाँ छोटे- बड़े सभी किसान अपनी सब्जियों , फलों एवं अन्य खाद्य सामग्री की बुकिंग करा सकेंगे।
जैसे - जैसे देश के दूसरे हिस्सों से किसान रेल की माँग आएगी। वैसे- वैसे ऐसी ट्रेनो की संख्या बढ़ाई जाएगी।
दूसरी किसान ट्रेन बरौनी से टाटा नगर के बीच च शुरू की गई। अगले साल डेडिकेटेड फ्रेंट काँरिडोर शुरू होने के बाद इस तरह की किसान ट्रेन दिल्ली , मुंबई , कोलकाता , चेन्नई जैसे देश के बड़े खपत केन्द्रों और बंदरगाहों तक ताजी सब्जी , फल , फूल आदि पहुंचाने लगेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जहाँ शहर के लोगों को ताजी वस्तुएं मिलेगी , वही किसानों को अपनी फसल स्थानीय मंडियों में बेचने की मजबूरी नही रहेगी। इन सब से बढ़कर फलों , सब्जियों की बनावटी कमी पैदा करके कीमत घटाने - बढ़ाने वाले बिचौलियों का खेल खत्म हो जाएगा।
वहीं सरकार द्वारा MPMC एक्ट में संसोधन करने से अब किसान अपनी फसल कहीं भी बेचने के लिए आजाद हैं। दरअसल सरकार इंटरनेट के जरिये कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार बना रही है। ताकि किसान अपनी उपज कहीं भी बेच सकें ।
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